
गुरु पूर्णिमा का पर्व अपने आप में बहुत ही दिव्य और पावन विशेषता लिए हुए हैं इस दिन गुरु की असीम शक्तियाँ शिष्य पर अपना पूर्ण प्यार और आशीर्वाद लूटाने के लिए हमेशा तत्पर रहती है वहीं दूसरी तरफ शिष्य भी अपने समर्पण से अपनी तपस्या से अपने गुरु के श्री चरणों में समर्पित होता हुआ उनकी कृपा प्राप्त करता है
गुरु पूर्णिमा का अर्थ शिष्य को पूर्णता प्रदान करना वहीं शिष्य भी समर्पित होता हुआ अपने गुरुओं से भौतिक आध्यात्मिक जैविक संपंन्ता प्राप्त करता है इस दिन शिष्य को चाहिए की तन मन धन से गुरु के श्री चरणों में खुद को समर्पित करता हुआ उनकी आज्ञा का पालन करें और गुरु से अपने लिए कुछ सेवा प्राप्त करें और वर्ष में उनकी आज्ञा का अनुकरण करें इस दिन शिष्य को संकल्प लेना चाहिए की वह निष्ठा और समर्पण से खुद को और अच्छा और आज्ञाकारी शिष्य और साधक बनने में प्रयासरत रहेगा वहीं शिष्य को गुरु पूर्णिमा के दिन दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण दीक्षा गुरु से लेनी चाहिए इसे गुरु हृदय स्थापन दीक्षा भी कहा जाता है जब हमारे हृदय से छल कपट काम क्रोध अहंकार को दूर कर उसे दिव्य कमल पर जो हृदय में गुरु स्थापित करते हैं उसमें गुरु की दिव्य शक्ति जो गुरु का ही रूप होती है स्थापित किया जाता है ऐसी दिव्य ऊर्जा गुरु पूर्णिमा के दिन गुरु अपने शिष्यों को दीक्षा के द्वारा प्रदान करते हैं दीक्षा पैसे देकर या खरीद कर नहीं ली जाती या तो शिष्य का गुरु के प्रति समर्पण भाव और उनके श्री चरणों में अपनी कमाई का अंश देना मात्र है जिसके माध्यम से गुरु आप सभी को अपनी उस कीमती प्रणश चेतन से निकालकर अद्भुत दीक्षा पात प्रदान करता है जो की लाखों रुपये खर्च कर भी साधक खरीद नहीं सकता आईए आप सभी इस गुरु पूर्णिमा पर खुद को समर्पित करते हुए उस गुरु उस महादेव और उस मा शक्ति की ऊर्जा को प्राप्त कर सकें
दीक्षा न्यौछावर् 7200/-